Monday, 27 July 2026
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असम में पत्रकारों पर हमलों को लेकर प्रेस एम्बलम कैंपेन ने जताई गहरी चिंता, दोषियों पर कार्रवाई की माँग

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नव ठाकुरिया/गुवाहाटी

वैश्विक मीडिया सुरक्षा एवं अधिकार संगठन प्रेस एम्बलम कैंपेन (PEC) ने असम में ड्यूटी पर तैनात पत्रकारों पर भीड़ द्वारा किए गए हालिया हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह घटना 15 अक्टूबर को बक्सा जिले में उस समय हुई जब कई मीडिया कर्मी वहाँ चल रहे विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे थे।

यह प्रदर्शन 19 सितंबर को सिंगापुर में असम के सांस्कृतिक प्रतीक जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मृत्यु के बाद न्याय की माँग को लेकर चल रहे आंदोलन का हिस्सा था। जब इस मामले से जुड़े पाँच आरोपियों को गुवाहाटी से बक्सा जेल स्थानांतरित किया जा रहा था, तब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पुलिस काफिले पर पथराव किया और रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों व वीडियो पत्रकारों को भी निशाना बनाया।
इस हिंसा में ध्रुबा बोरा, प्रदीप दास, परागमोनी दास (एनडी24), राणा डेका, बनजीत कलिता, अपुरा सरमा (एनके टीवी), ब्रेजेन तालुकदार, कृष्णा डेका (न्यूज़ लाइव), अभिजीत तालुकदार (डीवाई365), बिरिचनी डेका (न्यूज़18 असम/एनई), नोकुल तालुकदार (प्रतिदिन टाइम), जिंटुमोनी दास (प्रथम खबर), सौरव डे (प्राग न्यूज़), अख्येंद्र डेका (प्रतिबिंब लाइव) और दिलीप बोरो (ईटीवी भारत) सहित कई मीडिया कर्मी घायल हुए। उपद्रवियों ने गुवाहाटी स्थित एक सैटेलाइट चैनल के वाहन में आग भी लगा दी।
PEC के अध्यक्ष ब्लेज़ लेम्पेन ने कहा—“हम ड्यूटी पर मौजूद पत्रकारों पर हुए शारीरिक हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। वे केवल अपना पेशेवर कर्तव्य निभा रहे थे। सभी घायलों को शीघ्र चिकित्सीय सहायता मिलनी चाहिए और दोषियों को कानून के तहत सज़ा दी जानी चाहिए।”
लेम्पेन ने आगे कहा कि दक्षिण एशियाई देशों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों और वीडियो पत्रकारों के लिए विक्षुब्ध परिस्थितियों में रिपोर्टिंग के लिए विशेष प्रशिक्षण (ओरिएंटेशन कोर्स) आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि वे संकट के समय भी अपनी सुरक्षा बनाए रखते हुए निष्पक्ष पत्रकारिता कर सकें।