Thursday, 06 August 2026
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हिमाचल के एंटी चिट्टा मॉडल से सीखेंगे बाकी राज्य

एनसीबी ने हिमाचल प्रदेश से मॉडल का विवरण मांगा

फेस2न्यूज शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार का एंटी चिट्टा मॉडल जहां अपराधियों की कमर तोड़ने में कामयाब हो रहा है, वहीं इस मॉडल की चर्चा अन्य राज्यों में भी होने लगी है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के रीजनल ऑफिस ने इस बारे में हिमाचल प्रदेश से रिपोर्ट मांगी है ताकि इस मॉडल का अध्ययन करने के बाद अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके और चिट्टा कारोबार में संलिप्त अपराधियों पर प्रभावी ढंग से कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद चिट्टे की समस्या से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एक व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस योजना के तहत चिट्टे में संलिप्त अपराधियों के साथ-साथ पंचायत स्तर तक मैपिंग की गई है। हिमाचल प्रदेश, देश का पहला राज्य है, जहां पंचायतों में चिट्टे का नशा करने वालों और तस्करों की पहचान कर इन्हें रेड, येलो और ग्रीन श्रेणी के रूप में पहचाना गया है। सर्वे में पाया गया है कि प्रदेश की 234 पंचायतों में चिट्टे का प्रभाव सबसे अधिक है और इन्हें रेड श्रेणी में रखा गया है। इन पंचायतों में चिट्टे का प्रभाव कम करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश के एंटी चिट्टा मॉडल के तहत जहां चिट्टे के कारोबार में संलिप्त अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, वहीं इस समस्या के पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने पिट-एनडीपीएस एक्ट लागू कर 174 अपराधियों को हिरासत में लिया और इस तरह की बड़ी कार्रवाई करने पर हिमाचल प्रदेश देश भर में पहले स्थान पर रहा। इसके अतिरिक्त नशा तस्करों की 51 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं, जो पहले की तुलना में तीन गुणा अधिक है। 700 से ज्यादा मामलों में जांच की गई और 300 मामलों की आर्थिक जांच और संपत्ति जब्त करने के लिए उपयुक्त पाया है। राज्य सरकार ने पूर्ण संवेदनशीलता के साथ पीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए भी सकारात्मक कदम उठाए हैं।

प्रदेश में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के मानकीकरण की योजना अंतिम चरण में है। इसके अलावा नीति आयोग के साथ-साथ एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ के साथ मिलकर सिरमौर जिला के कोटला बड़ोग में एक आधुनिक पुनर्वास केंद्र बनाया जा रहा है। जल्द ही शिमला जिला के मशोबरा और कांगड़ा जिला के टांडा मेडिकल कॉलेज में भी पुनर्वास केंद्र शुरू होने वाले हैं। युवा पीढ़ी को चिट्टे की दलदल में जाने से रोकने के लिए स्कूल और कॉलेजों में ड्रग फ्री कैंपस अभियान, एंटी ड्रग शपथ और एंटी ड्रग सेल स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के एंटी चिट्टा अभियान को सफल बनाने के लिए समाज का हर वर्ग अपनी भागीदारी निभाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सामाजिक दबाव से बाहर निकलकर अभिभावक स्वयं टोल फ्री नंबर 112 पर अपने बच्चों में चिट्टे की लत छुड़ाने के लिए सहायता मांगने के लिए आगे आ रहे हैं।
प्रदेश सरकार के प्रयासों से जहां पीड़ितों का पुनर्वास सुनिश्चित कर उन्हें फिर से समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर मिल रहा है, वहीं अपराधियों के हौंसले भी टूट रहे हैं। पंचायत चुनावों के बाद अब राज्य सरकार चिट्टा तस्करी का समूल नाश करने के लिए इस अभियान का दूसरा चरण शुरू करने जा रही है, जो चिट्टा माफिया के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।