डेराबस्सी़ कृतिका:
सरकार द्वारा बीती 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। जिसके बाद नगर काऊंसिल जीरकपुर ने बड़े पैमाने पर चालान भी किए थे और दुकानों में पड़ा प्लास्टिक भी जब्त किया था। लेकिन यह कार्रवाई एक दो हफ्ते ही चली, जिसके बाद सिंगल प्लास्टिक का इस्तेमाल आम तरह हो गया था और अब प्लास्टिक का इस्तेमाल धड़ले से किया जा रहा है। सरकार द्वारा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली प्लास्टिक की 19 चीजों की सूची बनाकर जनतक की थी और उस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया था, सरकार ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक बनाने वाली फैक्ट्रीयों को भी एक महीने के अंदर अंदर मेनूफेकचरिंग बंद करने के आदेश दिए थे। यहां तक की दूध बेचने वाली कंपनियों को भी चेतावनी दी थी। लेकिन सभी आदेश हवाहवाई ही नजर आए। एक महीने बाद न तो इस ओर सरकार ने ध्यान दिया और न ही जिला प्रसाशन व लोकल स्तर पर नगर काऊंसिल ने इस ओर ध्यान दिया। दीपावली की बात करें तो लोगों द्वारा जमकर प्लास्टिक से बनी चीजों ओर प्लास्टिक के पॉलीथिन का इस्तेमाल किया था। जिसका अंदाजा कूड़े के ढेरों से लगाया जा सकता है।
प्लास्टिक के इस्तेमाल से पर्यावरण के साथ मवेशियों को भी हो रहा नुकसानः
माहिरों से प्राप्त की गई जानकरी अनुसार प्लास्टिक जल्दी गलता नही है और यदि उसे जलाया जाए पर्यावरण को नुकसान भी करता है। वहीं जब आम लोग सब्जी और फलों के छिलके इधर उधर फेंक देते हैं तो मवेशी खाने पीने की चीजों के साथ ही प्लास्टिक भी निगल जाते हैं। जिस कारण उन्हें भयंकर बीमारियां लग जाती है। जहां पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं इसे न तो लोग समझ पा रहे है और न ही प्रशासन। लोगों को समझना चाहिए कि पहले के मुकाबले हमारा पर्यावरण कितना दूषित हो चुका है और हम अपनी आनी वाली पीढ़ियों के लिए कांटे बिछाकर जा रहे हैं।
सरकार व अधिकारियों को लोगों को जागरूक करने के लिए करने चाहिए प्रयास :
किसी भी बात को लागू करने के लिए या तो जागरूकता का सहारा लेना पड़ेगा या फिर कानून को सख्ती से लागू करना पड़ेगा। यदि सरकार के आदेशों पर अधिकारी अपनी जिम्मेवारी समझकर सख्ती से लागु करवाएं तो शायद सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोका जा सकता है। इसके लिए अधिकारियों को मुहिंम चलाकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है की यदि प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकना है तो दुकानदारों की बजाए प्लास्टिक बनाने वाली फैक्ट्रीयों पर सिकंजा कसना होगा। जब रोक लगी थी और अधिकारी टीम बनाकर कार्रवाई कर रहे थे तो लोगों के मन में डर था, जो अब निकल चूका है।
त्योहारों के चलते टीमें व्यस्त थी। पहले भी काऊंसिल द्वारा करवाई की जा रही ओर आगे भी मुहिंम चलाकर लोगों को जागरूक भी किया जाएगा और चालान भी किए जाएंगे।
– रवनीत सिंह, कार्यकारी अधिकारी नगर काऊंसिल