सुल्तानपुर लोधी, फेस2न्यूज:
बाबा नानक के प्रकाश पर्व को समर्पित तीसरे नगर कीर्तन में पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब को हरा-भरा बनाने का आह्वान किया। निर्मल कुटिया पवित्र बेईं के किनारे गुरुद्वारा गुरुप्रकाश साहिब से शुरू हुआ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में आयोजित पांच प्यारियों के नेतृत्व में निकले इस नगर कीर्तन दौरान संत सीचेवाल ने पौधे बांटे। यह नगर कीर्तन आज सुबह शहीद ऊधम सिंह चौक के किनारे, गुरुद्वारा गुरु का बाग, महुल्ला सिखा, गुरुद्वारा बेबे ननकी का घर, गुरुद्वारा हट साहिब, गुरुद्वारा बेर साहिब से होते हुए पुन: पवित्र बेईं के किनारे निर्मल कुटिया पहुंचा। (MOREPIC1)
नगर कीर्तन दौरान, जहां संत सीचेवाल ने बाबा नानक की शिक्षाओं का गुणगान किया, वही उन्होंने गुरबाणी को उद्धृत किया और मनुष्य से प्रकृति के साथ अपने बंधन को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने नगर कीर्तन के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं का आभार जताया। संत सीचेवाल ने कहा कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संबंध खत्म होने से पर्यावरण में बड़ी गड़बड़ी हुई है जिससे ग्लोबल वार्मिंग बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वायु, जल और पृथ्वी के प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ रहा है। बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे लगाकर प्रदूषित वातावरण में सुधार किया जा सकता है। गुरु नानक देव जी की प्रकाश पूरब को समर्पित इन 3 नगर कीर्तनों के दौरान करीब 15000 पौधे बांटे गए। (MOREPIC2)
नगर कीर्तन का ऐतिहासिक गुरुद्वारों और बाबा बुद्ध दल और बाबा बिधि चंद संप्रदाय द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। नगर कीर्तन से पहले और बाद में गतका अखाड़े के खिलाड़ियों द्वारा गतका का प्रदर्शन किया गया। संत अवतार सिंह यादगारी स्कूल और कॉलेज के बच्चों ने जहां कीर्तन के जरिए सांगत को दिव्य भजनों से जोड़ा, उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर पर्यावरण को बचाने के लिए नारेबाजी की. इस अवसर पर रागी भाई तजिंदर सिंह के समूह ने नगर कीर्तन के दौरान रास-भिन्ना कीर्तन कर सांगत को मंत्रमुग्ध किया। सैफलाबाद से गुरुद्वारा गुरसर साहिब के प्रमुख सेवादार संत लीडर सिंह जी, गुरुद्वारा टाहली साहिब से सेवादार बाबा सुखा सिंह और संत सुखजीत सिंह सीचेवाल सहित अन्य संतों ने भी भाग लिया। नगर कीर्तन के अंत में संत सीचेवाल द्वारा सेवादारों का सम्मान किया। श्री गुरु नानक देव जी की 553वीं प्रकाश पर्व पर पवित्र बेईं के तट पर की गयी दीपमाला अलौकिक नजारा पेश कर रही थी।
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मनुष्य के प्रकृति वियोग से बिगड़ गया है पर्यावरण का ताना-बाना: संत सीचेवाल
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