Saturday, 02 May 2026
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1006 सैंपल ग़ैर मानक और 74 सैंपल असुरक्षित/ फेल पाये गए

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चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के फूड सेफ्टी विंग ने बीते सात महीनों के दौरान खाद्य पदार्थों के 5297 सैंपल लिए हैं, जिनमें से 1006 ग़ैर मानक और 74 असुरक्षित/ फेल पाये गए हैं। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री जौड़ामाजरा ने यह जानकारी देते हुये बताया कि असुरक्षित/ फेल पाये गए सैंपलों के विरुद्ध सख़्त कार्यवाही की जायेगी क्योंकि पंजाब सरकार मिलावटखोरी को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
स. जौड़ामाजरा ने जानकारी देते हुये बताया कि साल 2022 के दौरान अप्रैल महीने के दौरान लिए गए 820 सैंपलों में से 241 ग़ैर मानक और 18 असुरक्षित/ फेल पाये गए। इसी तरह मई महीने के 570 सैंपलों में से 91 ग़ैर मानक और 5 असुरक्षित/ फेल पाये गए। जून के दौरान 582 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 111 ग़ैर मानक और 17 सैंपल असुरक्षित/ फेल पाये गए। उन्होंने बताया कि जुलाई महीने के दौरान लिए गए 525 सैंपलों में से 111 और 3 सैंपल असुरक्षित/ फेल पाये गए। इसी तरह अगस्त महीने के दौरान 1016 सैंपलों में से 332 ग़ैर मानक जबकि 22 सैंपल असुरक्षित/ फेल पाये गए। उन्होंने बताया कि सितम्बर महीने के दौरान 800 सैंपलों में से 120 ग़ैर मानक और 9 सैंपल असुरक्षित/ फेल पाये गए। उन्होंने बताया कि अक्तूबर महीने के दौरान अब तक 984 सैंपल लिए गए हैं, जोकि जांच के लिए लैबारटरी को भेजे गए हैं और इनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
जौड़ामाजरा ने बताया कि फूड और ड्रग ऐडमनिस्ट्रेशन पंजाब का फूड सेफ्टी विंग पंजाब निवासियों को शुद्ध खाने पीने वाली वस्तुएँ मुहैया करवाने की जागरूकता मुहिम में नेतृत्व कर रहा है। फूड सेफ्टी विभाग अपने सलोगन ‘‘अगर यह सुरक्षित नहीं तो यह भोजन नहीं’’ के अंतर्गत लोगों को सुरक्षित और स्वास्थ्यमंद भोजन प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने बताया कि त्योहारों के सीजन को मुख्य रखते हुए फूड सेफ्टी विंग की तरफ से मिठाईयों पर लगाए जाने वाले चाँदी के वर्क में होने वाली मिलावट की जांच करने के लिए स्पैशल मुहिम चलाई गई है, जिसके अंतर्गत पूरे पंजाब में चाँदी के वर्क सहित मिठाईयों के 164 सैंपल भर कर फूड लैब खरड़ में भेज दिए गए हैं, जिन सैंपलों की रिपोर्ट फेल प्राप्त हुई, उनके विरुद्ध फूड सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही आरंभ की जायेगी।
उन्होंने बताया कि हालाँकि सिंथेटिक रंगों वाली खाने-पीने वाली वस्तुओं का सेवन किसी की स्वास्थ्य के लिए उच्च ख़तरा पैदा करता है और ऐसीं खाने-पीने की वस्तुओं को खरीदते समय खपतकारों को और ज्यादा जागरूक होने की ज़रूरत है। एफ. एस. एस. ए. आई. ने मंजूरी वाले रंगों के लिए पी. पी. एम. (पार्टस प्रति मिलियन) की सीमा निर्धारित की है। भोजन के रंगों के प्रयोग सम्बन्धित सभी एफ. बी. ओज को एफ. एस. एस. ए. आई. के दिशा-निर्देशों अनुसार कार्य करने के लिए कहा गया है। इसके इलावा इस दीवाली सीजन में फूड सेफ्टी विंग बासी या जले सूखे मेवो की बिक्री पर भी सक्रियता से पाबंदी लगा रहा है, जोकि आम तौर पर पैक किये जाते हैं और खपतकार खरीदते समय उनकी ताज़गी की जांच करने के योग्य नहीं होते।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि असुरक्षित या फेल पाये गए सैंपलों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के अधीन नियम बनाऐ हुए हैं, जिसके अंतर्गत ग़ैर मानक और मिसब्रांडेड आदि मामलों को समूह जिलों के ए. डी. सीज. की अदालतों में दायर किया जाता है, जिसमें इन दोषों के अधीन ज़ुर्माने करने का प्रस्ताव है। इसके इलावा जुडिशियल अदालतों में असुरक्षित या फेल सैंपलों के केस दायर करके जुर्माना और सज़ा देने के प्रबंध भी किये हुए हैं।
जौड़ामाजरा ने बताया कि त्योहारों के मद्देनज़र फूड सेफ्टी विंग की तरफ से अलग-अलग जिलों में इंटरडिस्ट्रिक टीमें बना कर अचानक चैकिंग की जा रही है और किसी भी तरह की मिलावटखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।