Wednesday, 22 July 2026
Breaking News
बरनाला के पास बदमाशों द्वारा फायरिंग, 2 शूटर काबू विश्व कराओके दिवस पर दिव्य कराओके सिंगिंग ग्रुप ने सजाई सुरों की महफ़िल हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने बढ़ाई राष्ट्रीय पुरस्कार की राशि, अब डेढ़ लाख​ मिलेंगे, नंबरदारों और आशा वर्कर्स का मानदेय भी बढ़ाया बरनाला में निकली भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे केंदीय मंत्री चिराग पासवान, संत निरंजन दास से लिया देश और समाज कल्याण का आशीर्वाद वूमन एंड चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी में किया किया शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन हरियाणा की करनाल नरवाल क्रिकेट अकादमी और टी.एस.एम. स्पोर्ट्स, चंडीगढ़ ने अपने लीग मैच जीते  चंडीगढ़ में श्रद्धा और भक्ति के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा,  रथ यात्रा पर निकले भगवान जगन्नाथ, उमड़ा जनसैलाब कुमारहट्टी का दुःखद हादसा और अवारा पशु एथनॉल मिश्रित ईंधन से कार हुई खराब, मारुति सुजुकी देगी नया कार: उपभोक्ता आयोग
राष्ट्रीय Trending

विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाई गई दादी प्रकाशमणि की 15वीं पुण्यतिथि

Read in:Hindi

देशभर से पहुंचे पांच हजार से अधिक लोगों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

राज सदोष/आबू रोड

ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि की 15वीं पुण्यतिथि पर देशभर से आबू रोड शांतिवन पहुंचे पांच हजार से अधिक लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में दादी की पुण्यतिथि संस्थान के भारत सहित विश्वभर के सेवाकेंद्रों पर मनाई गई।

सबसे पहले मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी ने श्रद्धासुमन अर्पित कर दादीजी के संग के अपने अनुभव सांझा किए। ब्रह्माकुमारीज की संयुक्त मुख्य प्रशासिका बीके मुन्नी बहन ने कहा कि दादी जी की शिक्षाओं और प्रेरणाओं से आज इतने बड़े ईश्वरीय परिवार का कुशल संचालन कर पाती हूं। दादीजी के जीवन की तीन मुख्य शिक्षाएं थीं- निमित्त, निर्माण और निर्मल वाणी जिसे अपने जीवन में फॉलो करने के साथ बीके भाई-बहनों के जीवन में धारण करा सकूं।(SUBHEAD)

महासचिव बीके निर्वैर भाई ने दादी के संग के अनुभव बताते हुए कहा कि दादी भाई-बहनों को अपना परिवार का सदस्य मानते हुए उसी तरह संभाल करतीं थीं। उनका सरल व्यवहार, मधुर वाणी और निमित्त भाव ही था कि वह एक-एक भाई-बहन से हालचाल पूछतीं और उनके साथ भोजन करती थीं। वह त्याग और ममता की मूरत थीं।

वरिष्ठ राजयोग शिक्षक बीके सूरज भाई ने कहा कि दादीजी का प्रयास रहता था कि वह भाई-बहनों की विशेषता देखकर उसी अनुसार सेवा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती थीं। दादी से मिलकर सभी को ऐसा एहसास होता था कि दादी मेरी हैं। सभी को अपनेपन की फीलिंग आती थी।

दादीजी को श्रद्धांजली देने के लिए भाई-बहनों का सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक तांता लगा रहा। इस दौरान सभी ने दादीजी को योग और पुष्पों से श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम के समापन पर विशेष भोग लगाया गया और ब्रह्माभोजन का आयोजन किया गया।