पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंक के वृद्ध पेंशनर्स 25 अगस्त को देंगे मांग धरना
(MOREPIC1)आर के शर्मा/चंडीगढ़
माननीय हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद भी पंजाब स्टेट कोपरेटिव ऐग्रीकल्चर डिवलपमेंट बैंक के वृद्ध पेंशनर्स अपनी पेंशन के लिये अभी तक वंचित हैं। बावजूद इसके दोनों कोर्ट ने फैसला पेंशनर्स के हक में दिया परन्तु बैंक अधिकारी सर्वोच्च न्यायलय के फैसले की धज्जियों उड़ाते हुये पैंशनर्स का निरंतर पीड़ित कर रहे हैं।
सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस को सबोंधित करते हुये बैंक के प्रभावी पेंशनर्स की ट्राईसिटी ऐसोसियेशन के संयोजक राजेन्द्र मिलू ने बताया कि बैंक की अनदेखी और अडियल रवैये के चलते बुढ़ापे में भी अपनी कमाई के लिये प्रदेश के 1130 वृद्ध पेंशर्स को अभी भी धैर्य का परिचय देना पढ़ रहा है जिनमें से लगभग 400 विधवायें भी शामिल हैं। 95 फीसदी पेंशनर्स 70 से 91 आयु वर्ष के हैं जो कि पेंशन की आस में बैठे हैं।
पूरे मुद्दे पर प्रकाश डालते हुये उन्होंने बताया कि बैंक के कर्मियों के लिये एक अप्रैल 1989 से पेंशन का प्रावधान शुरु हुआ था जिसे 31 मार्च 2010 को बंद कर दिया गया। एक अप्रैल 2010 में बैंक ने पेंशन में 30 से 40 फीसदी की व्यापक कटौती कर दी जो कि बैंक कर्मियों को गंवारा नहीं था।(SUBHEAD)
हाई कोर्ट में दायर केस में 31 अगस्त 2013 को बैंक कर्मियों के हित में फैसला आया जिसके बाद बैंक ने हाई कोर्ट की डबल बेंच मे उसी ऑर्डर को चुनौती दे दी। हाई कोर्ट के डबल बैंच ने भी 29 जुलाई 2019 को पेंशनर्स के हक में फैसला दिया। बैंक ने डबल बेंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में 14 नवंबर 2019 को चुनौती दी परन्तु उनकी आशाओं के विपरीत सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चुनौती खारिज करते हुये 11 जनवरी 2022 को पैंशनर्स के हक में फैसला सुनाया।
बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डालते हुये मामला ओर लंबित करने का प्रयास किया परन्तु 12 अप्रैल 2022 को फैसला एक बार फिर पेंशनर्स के हक में आया। कोर्ट ने बैंक को सख्त निर्देश दिये कि लंबित पेंशन को पुराने एरियर के साथ 12 किस्तों में पेंशनरों का भुगतान किया जाये जिसकी समय सीमा 31 दिसंबर 2022 तक तय की गई ।
कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुये बैंक अभी तक मात्र छह किश्तों की पेंशन ही जुटा पाया है। पेंशनर्स ने यह भी आरोप जड़े की बैंक उन्हें 2013 से रिवाईज्ड पेंशन का लाभ नहीं दे रहा है जो कि आदेशों के खिलाफ है।