पटियाला मंडी बोर्ड के अधिकारियों द्वारा ली गई रिश्वत की रिकवरी के साथ उन्हें डाला जाये सलाखों के पीछे, ठेकेदारों की मांग, ऐसोसियेशन की गुहार बढ़ती जीएसटी दर, माईनिंग पालिसी के जल्द लागू और बकाया भुगतान पर दे सरकार राहत
(MOREPIC1)आर के शर्मा/चंडीगढ़
पंजाब हाॅटमिक्स प्लांट ओनर्स ऐसोसियेशन (एचएमपीओए ) के सदस्य ठेकेदारों को सड़क व अन्य भवन निर्माण के दौरान प्रदेश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार और उनके कार्यक्षेत्र में पेश आ रही चुनौतियों के मद्देनजर उनके एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब सरकार से गुहार लगाई है।
प्रतिनितिमंडल ने वित्तमंत्री को उनके प्रदेशव्यापी भ्रष्टाचार मुक्त अभियान को मजबूती देने के लिये एक ज्ञापन सौंपा तथा पटियाला और संगरुर में ठेकेदारों से पंजाब मंडी बोर्ड के अधिकारियों में पनप रही खुली रिश्वतखोरी से अवगत करवाया और साथ ही उनके खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। इसके साथ ही ज्ञापन में ऐसोसियेशन को पेश आ रही चुनौतियां जैसे मंहगे होते जा रहे कच्चे माल, माईनिंग पाॅलिसी के जल्द लागू, बढ़ती जीएसटी की दर और लंबित बकाये भुगतान से राहत प्रदान करने की मांग की है।(SUBHEAD)
प्रदेश में इस ऐसोसियेशन से लगभग 200 ठेकेदार सदस्य और हजारों की तायदाद में एलाईड ठेकेदार हैं, जो कि नैश्नल हाईवे, स्टेट हाईवे, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पुलों, कैनाल्स सहित अन्य सरकारी भवनों का निर्माण व मरम्मत करवाते हैं। सोमवार को चंडीगढ़ प्रेस कल्ब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ऐसोसियेशन के अध्यक्ष बलविंदर सिंह सिद्धवा और महासचिव जेपी सिंगला ने आरोप लगाया है कि पटियाला स्थित पंजाब मंडी बोर्ड में तैनात इंजीनियर दविन्दर सिंह मोमी, इंजीनियर परमिंदर सिंह और एसडीओ अमृतपाल सिंह ने टेंडर के अलाॅटमेंट के समय 4.5 फीसदी कमीशन के रुप में रिश्वत ली जबकि बाकी रिश्वत बिल के पास होने पर मांग की है।
इन अधिकारियों द्वारा फैलाये जा रहे भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश के ठेकेदार काफी नाराज हैं। ऐसोसियेशन ने सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुये कहा कि इस रिश्वतखोरी में नीचे से लेकर उच्चाधिकारी तक शामिल हैं जिससे की निचले स्तर पर कार्यरत इंजीनियर और एसडीओ बिना किसी डर के खुले मुंह रिश्वत की मांग करते हैं। इन अधिकारियों द्वारा कुछ लड़के प्राईवेट टैकनिकल और नाॅन टेक्नीकल तौर पर रखे हैं जिनका काम चलते प्रोजेक्ट्स पर रिश्वत नहीं दिये जाने को रोकना है। धमकी यहां तक भी दी जाती है यदि कमीशन नहीं दिया गया तो खामियां निकाल कर उनके टेंडर रद्द करने की भी पावर है। पीड़ित ठेकेदार जगपाल मित्तल, अंकित बंसल, भीमसेन, जसवीर कुमार शर्मा और पंकज जिंदल इन अधिकारियों की मनमानी का शिकार हैं।
सिद्धवा इस गंभीरता को ओर उजागर करते हुये कहा कि पंजाब सरकार द्वारा थर्ड पार्टी की नियुक्ति की जाती है जिसका काम सड़क निर्माण में की गुणवत्ता की जांच करना है। परन्तु क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर मंडी बोर्ड के साथ मिलीभगत के चलते ठेकेदारों पर कमीशन के हिसाब क्लियर करने का दबाव डालता है।
ठेकेदारों पर अक्सर टेंडर को बीच में ही रोक देने के साथ साथ ठेकेदारी का लाइसेंस को रद्द करने का भी पूरा पूरा दबाव डाला जाता है। सिद्धवां के साथ प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अन्य पदाधिकारियों – जानकी राम गुप्ता, मोहन सिंह, कुलविंदर सिंह के साथ साथ जोनल प्रधान तारा सिंह और रमेश कुमार गुप्ता ने भी इन आरोपों को मजबूती दी।
ऐसोसियेशन ने पुरजोर मांग की है कि अधिकारियों के तबादले इस समस्या का हल नहीं हैं बल्कि इस समूचे भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर अधिकारियों द्वारा वसूली रिश्वत रिकवर कर उन्हें सलाखों के पीछे डालकर भ्रष्टाचार मुक्त पंजाब का निर्माण किया जाना चाहिये।
इसी के साथ ऐसोसियेशन सदस्यों ने उन्हें पेश आ रही चुनौतियों से भी अवगत करवाया। सिद्धवा के अनुसार युक्रेन युद्ध और बढ़ती मंहगाई के चलते स्टील, एलडीओ तेल, डीजल, सीमेंट, बजरी, पत्थरी व सड़क निर्माण में काम आने वाली सामग्रियां की कीमतों में खासा ईजाफा हुआ है। ऐसोसियेशन की मांग थी कि घोषित हुई माईनिंग पोलिसी को जल्द से जल्द लागू किया जाये और उसी के अंतर्गत नये टेंडरों में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों के रेट उसी के आधार पर लगाये जायें। उन्होंने यह भी मांग की है कि 12 से 18 फीसदी जीएसटी दर के हिसाब से बकाया राशि भी 18 फीसदी की दर से दी जाये।
कांफ्रेस के दौरान ठेकेदारों ने पंजाब सरकार से यह भी गुहार लगाई कि उनके द्वारा गत वर्षो में पूरे किये गये विभिन्न प्रोजेक्ट्स का बकाया जोकि लगभग 700 करोड़ रुपये है, का भी जल्द भुगतान किया जाये।