Tuesday, 15 September 2026
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हरियाणा लोक भवन में उत्साहपूर्वक मनाया गया 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

सामूहिक योगाभ्यास में शामिल हुए राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष एवं प्रथम महिला मित्रा घोष, योग भारतीय संस्कृति का विश्व को दिया गया अमूल्य आध्यात्मिक उपहार, विश्व के 150 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 

फेस2न्यूज /चंडीगढ़

हरियाणा लोक भवन में रविवार को 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया गया। हरियाणा योग आयोग तथा आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर प्रदेश की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि वर्तमान भारत सरकार न केवल देशवासियों के कल्याण के लिए, बल्कि समस्त मानवता के हित में भी निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व योग के मूल्यों को अपना रहा है और उनसे प्रेरणा ले रहा है। योग भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन सभ्यता का अभिन्न अंग है।

राज्यपाल ने कहा कि योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन तथा उत्तम स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि मानसिक शांति से शरीर और मन दोनों का सर्वांगीण विकास संभव होता है।

प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व के 150 से अधिक देशों में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। योग शरीर को सुदृढ़ बनाता है, मन को शांत करता है, चिंतन शक्ति को विकसित करता है तथा बौद्धिक क्षमता को बढ़ाता है। इस प्रकार यह व्यक्ति और समाज, दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि कुछ विचार ऐसे होते हैं जो भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर सार्वभौमिक स्वरूप ग्रहण कर लेते हैं। योग भारतीय संस्कृति का ऐसा ही एक अमूल्य आध्यात्मिक उपहार है, जिसे भारत ने विश्व को प्रदान किया है। योग के महत्व का उल्लेख ऋग्वेद, उपनिषदों तथा महर्षि पतंजलि के योग-दर्शन में मिलता है, जो भारत की दार्शनिक एवं आध्यात्मिक परंपरा में इसकी गहरी जड़ों का प्रमाण है।

राज्यपाल ने स्वामी विवेकानंद के योगदान का भी स्मरण करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपने ऐतिहासिक संबोधन के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की महानता को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया। उनके विचारों से प्रेरित होकर पश्चिमी देशों के अनेक लोगों ने योग के सिद्धांतों और मूल्यों को अपनाया।

कार्यक्रम की सराहना करते हुए प्रो. असीम कुमार घोष ने आशा व्यक्त की कि आयोजक भविष्य में भी प्रतिवर्ष ऐसे आयोजन करते रहेंगे तथा योग के व्यापक लाभों के प्रति जन-जागरूकता को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

कार्यक्रम में सामूहिक योगाभ्यास आयोजित किया गया, जिसमें योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान की क्रियाओं का अभ्यास कर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव विजयकुमार भाविकट्टी, राज्यपाल के परिसहाय धीरज सेतिया सहित लोक भवन के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। समारोह का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के संकल्प के साथ हुआ।