ग़ज़ल
वो कॉलेज के दिन वो गुज़रे ज़माने
बहुत याद आते हैं दोस्त पुरानेजहां बैठ कर चाय पीते थे हम तुम
कहां भूलते हैं भला वो ठिकानेअगर दोस्तों से कभी रूठ जाते
न आता था कोई किसी को माननेसभी लड़कियों पर फ़िदा हो के रहते
ले जाते थे सब को समोसे खिलानेहैं गुज़रे ये मंज़र मुझे याद अब तक
तभी तो मैं आया हूं तुम को सुनाने— मनमोहन सिंह ‘दानिश’