जीरकपुर, कृतिका:
चंडीगढ़ के एक कॉन्वेंट स्कूल में तीन महीने पहले पेड़ गिरने से हुए दर्दनाक हादसे में एक बच्चे की मौत के बाद स्कूल जाने वाले बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी स्कूलों को नोटिस जारी कर स्कूलों में लगाए गए पेड़ों और सूखे और मुड़े हुए पेड़ों की जानकारी भी मांगी थी। वहीं डेराबस्सी के भांखरपुर गांव के निवासियों ने अपना विरोध जताते हुए कहा कि उनके गांव के सरकारी स्कूल में लगाए गए 7 बड़े सफ़ेदे के पेड़ एक तरफ झुके हुए हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं और दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इस बारे में ग्रामीण जसविंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने पत्र लिखकर उक्त मामले को शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में लाया था, लेकिन कागजी कार्रवाई के अलावा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कई बार स्कूल स्टाफ से शिकायत करने के बाद भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने पंजाब सरकार और शिक्षा मंत्री से इस पर ध्यान देने और जल्द से जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। वहीं जसविंदर सिंह ने बताया कि वन विभाग ने 1/09/2021 को उक्त पेड़ों को काटने की अनुमति दी थी और इसके बजाय दस गुना अधिक पौधे लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन स्वीकृति के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्कूल प्रिंसिपल और शिक्षा विभाग द्वारा उक्त पेड़ों को काटने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे स्कूली छात्र मौत के साये में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते हुई बारिश और हवा के कारण स्कूल में एक सफेदे का पेड़ गिर गया था, लेकिन रविवार होने के कारण स्कूल बंद था, नहीं तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था और स्कूल प्रबंधन को इसके बारे में कुछ पता नहीं होता। गौरतलब है कि पूर्व में सरकार ने पंचायत की जमीनों और सरकारी संस्थानों में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी, जिसके चलते कोई भी पेड़ नहीं काटा जा सकता था।
इस मामले को लेकर जब सरकारी स्कूल की मुख्यध्यापिका ज्योति से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन काट दिया।
इस बारे में मोहाली शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी सुशील नाथ से बात करने पर उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन अगर वन विभाग ने उक्त पेड़ों को काटने की अनुमति दी थी तो उन्हें क्यों नहीं काटा गया? इसके बारे में जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर अनुमति एक साल से अधिक पुरानी हो गई है तो उक्त पेड़ों को काटने की अनुमति फिर लेनी होगी। उसके बाद ही पेड़ों को काटा जा सकता है।
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चडीगढ़ के स्कूल की तरह गांव भांखरपुर के सरकारी स्कूल में भी हो सकता है हादसा
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