चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम सम्बन्धी स्थिति पर कड़ी नजऱ रखने और बीमारी को नियंत्रित करने के लिए ज़रुरी कदम उठाने हेतु पशु पालन विभाग अधिकारियों को हिदायत दी है कि तीन दिनों में समूह गौशालाओं में टीकाकरण मुकम्मल किया जाये।
राज्य में फैली बीमारी की रोकथाम के लिए चल रहे राहत कामों का जायज़ा लेते हुये वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल और पशु पालन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने न्योता दिया कि बीमारी की रोकथाम सम्बन्धी कार्य को मिशन के तौर पर लिया जाये और टीकाकरण सम्बन्धी रोज़ाना 50,000 का लक्ष्य यकीनी बनाया जाये।
कैबिनेट मंत्रियों ने कहा कि पशु पालकों पर पड़ी इस मुसीबत को हमें सख़्ती से निपटना पड़ेगा और बीमारी की रोकथाम के लिए चल रहे कामों में ढील बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मंत्रियों ने सख़्त लहज़े में हिदायत की कि खऱाब कारगुज़ारी वाले मुलाजि़मों को कारण-बताओ नोटिस जारी किया जाये। उन्होंने कहा कि पशुओं के इलाज के काम को पूरा करने के लिए मुलाजि़मों की छुट्टियाँ रद्द की जाएं। उन्होंने कहा कि ज़रूरत अनुसार जैनरिक दवाओं का प्रयोग भी किया जाये।
इसी तरह अफ्रीकन स्वाईन फीवर सम्बन्धी चल रहे कामों की समीक्षा करते हुये मंत्रियों ने कहा कि ‘‘जानवरों में छूत की बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण एक्ट, 2009’’ की हिदायतें यथावत लागू की जाएँ और सूअरों की आवाजाही पर मुकम्मल रोक लगाई जाये।
पशु पालन विभाग के प्रमुख सचिव विकास प्रताप ने बताया कि अब तक पशु पालन विभाग को गोट पौक्स वैक्सीन की 6.86 लाख ख़ुराकें मिल चुकी हैं। विभाग द्वारा 3.31 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है जबकि 3.54 लाख से अधिक डोज़ विभाग के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के 1,08,958 पशु लम्पी स्किन से प्रभावित होने का शक है, जिनमें से 64,475 पशु ठीक हो चुके हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पशुओं को टीका बिल्कुल मुफ़्त लगाया जा रहा है।
विकास प्रताप ने बताया कि पशु पालन विभाग को ग्रामीण विकास फंड में से दवा और अन्य सामान खऱीदने के लिए 1 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि मरे हुए पशुओं के शवों को खुले में फेंकने के रुझान को रोकने और शवों के उचित निपटारे को यकीनी बनाने के लिए जि़ला प्रशासन को हिदायतें पहले ही जारी की जा चुकीं हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी की रोकथाम के लिए अलग-अलग जि़लों में 179 वैटरनरी इंटरनज़ और पैरा-वैटरनरी विद्यार्थियों की तैनाती के इलावा, पशु पालकों को बीमारी के कारणों एवं फैलाव और प्रभावित पशुओं के दूध के सुरक्षित सेवन सम्बन्धी जागरूक करने के लिए स्कूलों के विद्यार्थियों को भी जागरूकता मुहिम में शामिल किया गया है।
मीटिंग दौरान यह मुद्दा भी विचारा गया कि ज़रूरत पडऩे पर सामाजिक संगठनों और दूसरे डाक्टरों की सेवाएं भी ली जाएँ।
पंजाब
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लम्पी स्किन बीमारी: तीन दिनों में समूह गौशालाओं में टीकाकरण मुकम्मल करने के निर्देश
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