Thursday, 10 September 2026
Breaking News
एंटी-स्ट्रेस सेमिनार ने जीसीसीबीए 50 के छात्रों को सिखाए तनाव दूर करने के आसान तरीके मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की भेंट, अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह मां मनसा देवी निष्काम सेवक संघ ने लगाया 12वां ब्लड डोनेशन कैम्प मनोज धीमान की हिंदी की दो और फिक्शन पुस्तकें प्रकाशित m‘राज़ की बात’ और ‘महामानव’ के प्रकाशन के साथ हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की संख्या दस हुई पौड़ी गढ़वाल एकता मंच के महिला प्रकोष्ठ ने किया रामायण पाठ का आयोजन शिक्षा में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए इंदु बब्बर राज्य पुरस्कार से सम्मानित आचार्य देवों भवा 2026 में चंडीगढ़ से पहुंचे डॉ. अमनदीप सिंह को ज्योतिष एवं अंकशास्त्र के क्षेत्र में विशेष सम्मान 1965 के भारत-पाक युद्ध की दास्तां, जब फाजिल्का क्षेत्र खाली हो गया था संत विनोबा भावे सम्मान-2026 समारोह में साहित्य, पत्रकारिता एवं समाजसेवा की विभूतियाँ सम्मानित उत्तराखंड भ्रातृ संगठन का भव्य लाइट एंड साउंड शो और श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का सफल मंचन
मनोरंजन Trending

मुर्दा बोले कफ़न फाड़े

मनमोहन सिंह ‘दानिश’

एक एंकर है। टीवी पर कुछ न कुछ बोलना होता तो बोलती है। अब एक डिप्लोमा करके बेचारी को नौकरी मिली है। नहीं तो बेरोजगारों या फिर हमारे एक आदिल की जुबान में बोलें तो कॉकरोचों की कतार में खड़ी होती। अब उसकी मजबूरी है कि जो भी टेलीप्रॉन्पटर पर लिखा आ जाए वह तो उसे पढ़ना ही है। इत्तेफाक यह है कि उसके आका तो बेचारे स्कूल गए ही नहीं। वे भला क्या जाने कैसे पढ़ा और पढ़ाया जाता है। कभी स्कूल के आगे पीछे से जाते हुए कुछ अलफ़ाज़ कान में पड़ गए होंगे। इनके लिए वही काफी हैं। अब ऐसे विद्वान नेताओं को डिप्लोमा होल्डर एक ” विदुषी” मिल गई।

इन्हें लगा कि इस महिला से अधिक पढ़ा लिखा तो कोई होगा ही नहीं। और यह महिला अगर 1987-88 के ज़माने में होती तो कोई उसे स्ट्रिंगर भी नहीं रखता।

पत्रकारिता के नाम पर तलवे चाटना इनकी फितरत है। एक और महिला ऐंकर हैं उसने तो विपक्ष को धमकी दे डाली कि विपक्ष जितनी आलोचना सरकार की करेगा वो उतनी सरकार की तारीफ़ करेंगी। अब क्या पत्रकार भांड मिरासी वाला काम करने से भी गुरेज नहीं करेंगे?

खैर, जो भी हो ऐसे अजूबों को अगर आप गम्भीरता से न लें तो ऐसे लोग मनोरंजन का बड़ा साधन हैं। जिस तरह नाटकों में किसी विदूषक की भूमिका वही भूमिका के लोग निभाते हैं। और अगर हम इन्हें पूरी तरह से नाकार दें तो ये लोग मदारी के सिवा और कुछ भी नहीं हैं। इन लोगों के पास झूठे आंकड़ों के अलावा और कुछ नहीं होता। तो इन्हें चीख चीख कर बोलने दी जिये पर उनकी किसी बात पर ध्यान मत दें। बजुर्गों ने सही कहा है कि ” मुर्दा बोले कफ़न फाड़े “।