Tuesday, 28 July 2026
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बड़ी बेचैन करती हैं सभी यादें वो बचपन की…..

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                         ग़ज़ल

बड़ी बेचैन करती हैं सभी यादें वो बचपन की
मुझे सोने नहीं देती कभी यादें वो बचपन की

अकेला मैं नहीं रहता कभी तन्हाइयों में भी
मेंरे तो साथ रहती हैं सदा यादें वो बचपन की

कभी जब मैं लगूं रोने नमी आंखों में आ जाए
गले मुझ को लगाती हैं यही यादें वो बचपन की

कभी जो साथ पढ़ते थे मिलें जब बाद मुद्दत के
चली आतीं उन्हीं के साथ सब यादें वो बचपन की

उदासी जब कभी घेरे उड़ा दे नींद रातों की
मुझे लोरी सुनाती हैं मेरी यादें वो बचपन की

मेरे साथी सभी बिछुड़े कभी मिलने नहीं आते
मगर मां से मिलाती हैं मुझे यादें वो बचपन की

गमों का बोझ बढ़ जाए परेशानी सताए जब
सहारा मुझको देती हैं मेरी यादें वो बचपन की

गया जिस दिन ज़माने से अकेला मैं न जाऊंगा
मेरे तो साथ जाएंगी सभी यादें वो बचपन की

                 – मनमोहन सिंह 'दानिश'